pittjvar meaning in hindi
पित्तज्वर के हिंदी अर्थ
संज्ञा, पुल्लिंग
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वह ज्वर जो पित्त के दोष या प्रकोप से उत्पन्न हो , पित्तवृद्धि से उत्पन्न ज्वर , पैत्तिक ज्वर
विशेष
. वैद्यक ग्रंथों के अनुसार आहार विहार के दोष से बढ़ा हुआ पित्त आमाशय में जाकर स्थित हो जाता है और कोष्ठस्थ अग्नि को वहाँ से निकालकर बाहर की और फेंकता हैं । अतीसार, निद्रा की अल्पता, कंठ, ओठ, मुँह और नाक का पका सा जान पड़ना, पसीना निकलना, प्रलाप, मुँह का स्वाद कड़वा हो जाना, मूर्छा, दाह, मत्तता, प्यास, भ्रम, मल, मूत्र और आँखों में हल्दी की सी रंगत होना आदि इस ज्वर के लक्षण हैं ।
पित्तज्वर के अँग्रेज़ी अर्थ
Noun, Masculine
- bilious fever
पित्तज्वर के तुकांत शब्द
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