स्रोत : संस्कृत

'आर्य' के हिंदी अर्थ

विशेषण

  • श्रेष्ठ, उत्तम
  • बड़ा, पूज्य
  • श्रेष्ठ कुल में उत्पन्न, मान्य
  • आर्य जाति संबंधी, आर्य जाति का

संज्ञा, पुल्लिंग

  • श्रेष्ठ पुरुष, श्रेष्ठ कुल में उत्पन्न

    विशेष
    - स्वामी, गुरु और सुहद् आदि को संबोधन करने में इस शब्द का व्यवहार करते हैं। छोटे लोग बड़े को जैसे—स्त्री पति को, छोटा भाई बड़े भाई को, शिष्य गुरु का आर्य या आर्यपुत्र कहकर संबोधित करते हैं। नाटकों में नटी भी सूत्रधार को आर्य या आर्यपुत्र कहती है।

  • मनुष्यों की एक जाति जिसने संसार में बहुत पहले सभ्यता प्राप्त की थी

    विशेष
    - ये लोग गोरे, सुविभक्तांग और डील के लंबे होते हैं। इनका माथा ऊँचा, बाल घने, नाक उठी और नुकीली होती है। प्राचीन काल में इनका विस्तार मध्य एशिया तथा कैस्पियन सागर से लेकर गंगा यमुना के किनारों तक था। इनका आदिस्थान कोई मध्य एशिया, कोई स्कडिनेविया और कोई उत्तरीय ध्रुव बतलाते हैं। ये लोग खेती करते थे, पशु पालते थे, धातु के हथियार बनाते थे, कपड़ा बुनते थे और रथ आदि पर चलते थे।

    उदाहरण
    - उत्तर भारतीयों के अनुसार उनके वैदिक कालीन पूर्वज आर्य थे।

  • सावर्णि मनु का एक पुत्र
  • बौद्ध धर्म का पालन करने वाला व्यक्ति

'आर्य' के गढ़वाली अर्थ

विशेषण, पुल्लिंग

  • एक प्राचीन सभ्य जाति जो भारत में द्रविड़ और शूद्रों से भिन्न है तथा द्विजाति नाम से प्रसिद्ध है; आदरणीय, भद्र, धर्म के प्रति आस्थावान व्यक्ति, श्रेष्ठ, मित्र, आचार्य

'आर्य' के ब्रज अर्थ

पुल्लिंग

  • आदरणीय, प्रतिष्ठित या श्रेष्ठ व्यक्ति
  • गुरु , आचार्य ; पति

'आर्य' के मैथिली अर्थ

विशेषण

  • सभ्य
  • एक मानव प्रजाति

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