तिरमिरा

तिरमिरा के अर्थ :

तिरमिरा के हिंदी अर्थ

संस्कृत ; संज्ञा, पुल्लिंग

  • दुर्बलता के कारण दृष्टि का एक दोष जिसमें आँखें प्रकाश के सामने नहीं ठहरतीं और ताकने में कभी अँधेरा, कभी अनेक प्रकार के रंग और कभी छिटकती हुई चिनगारियाँ या तारे से दिखाई पड़ते हैं
  • कमज़ोरी से ताकने में जो तारे से छिटकते दिखाई पड़ते हैं उन्हें भी तिरमिरे कहते हैं
  • तीक्ष्ण प्रकाश या गहरी चमक के सामने दृष्टि की अस्थिरता, तेज रोशनी में नज़र का न ठहरना, चकाचौंध

हिंदी ; संज्ञा, पुल्लिंग

  • घी, तेल या चिकनाई के छींटे जो पानी, दूध या और किसी द्रव पदार्थ (दाल, रसा आदि) के ऊपर तैरते दिखाई देते हैं

तिरमिरा के हरियाणवी अर्थ

संज्ञा, पुल्लिंग

  • तरल पदार्थ की सतह पर तैरने वाली स्निग्धता
  • नेत्र-दोष के कारण आँखों के सामने उड़ते दिखाई पड़ने वाले कण

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