Synonyms of satya
सत्य के पर्यायवाची शब्द
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अच्छा
जो अपने वर्ग में उपकारिता, उपयोगिता, गुण, पूर्णता आदि के विचार से औरों से बढ़कर और फलतः प्रशंसा या स्तुति के योग्य हो, उत्तम, भला, बढ़िया, उम्दा
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अधिक
अधिक अंश से संबंधित या अधिक अंश का या जो अधिक मात्रा में हो, बहुत, ज़्यादा
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अवितथ
सत्य, अमिथ्या
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अश्वत्थ
एक प्रसिद्ध बड़ा वृक्ष जो हिंदुओं तथा बौद्धों में बहुत पवित्र माना जाता है, पीपल, क्षीरद्रुम, महाद्रुम
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असली
सच्चा, खरा
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अस्तित्व
सतीत्व का अभाव , कुलटापन , स्वैच्छाचार
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अहद
प्रतिज्ञा , वादा , इकरार , क्रि॰ प्र॰— करना = प्रतिज्ञा करना , — टूटना= प्रतिज्ञा भंग होना , — तोड़ना= प्रतिज्ञा भंग करना , वादा पूरा न करना
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आत्मतत्व
आत्मा या परमात्मा का तत्व, आत्मा का यथार्थ स्वरूप
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आत्मीय
अपन, स्वीय, निकट सम्बन्धबाला|
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आप्त
प्राप्त, पाया हुआ
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उचित
औचित्यपूर्ण, योग्य , ठीक , उपयुक्त , मुनासिब , वाजिब
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ऊर्जा
शक्ति, बल
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ऋत
उंछवृत्ति
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कर्मफल
पूर्वजन्म में किए हुए कार्मों का फल, दुःख-सुख आदि
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क़सम
सौगन्ध, शपथ
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कुशल
कल्याण मंगल
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क्षीरद्रुम
अश्वत्थ
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गजभक्षक
पीपल
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चलदल
पीपल का वृक्ष जिसके पत्ते अधिकतर हिलते रहते हैं
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चलपत्र
पीपल का वृक्ष, एक प्रसिद्ध बड़ा वृक्ष जो हिंदुओं तथा बौद्धों में बहुत पवित्र माना जाता है
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चेतना
चेतनता
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चैतन्य
चित् स्वरूप, आत्मा ज्ञान
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जल
पानी, नीर
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जीवन
प्राण, जान
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जीवनी
जीवनक वृत्तान्त
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जोड़ा
एक ही तरह की दो वस्तुए या जीव; युग्म, युगल पति-पत्नी, मिले हुए, 3 समान कर्म, गुण, आकार की वस्तुएं या प्राणी
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ज्ञान
दे. ग्यान
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ज्यों का त्यों
जैते का तैसा, उसी रूप रंग का, तद्रूप, सदृश
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ठीक
जैसा हो वैसा , यथार्थ , सच , प्रमाणिक , जैसे,—तुम्हारी बात ठीक निकली
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तथोक्त
वैसा वर्णित, जैसा कहा गया है
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तथ्य
सत्य , सच्ची बात , यथार्थता
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तद्वत्
उसी के जैसा, वैसा ही, उसके समान, ज्यों का त्यों
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त्रेता
चार युगों में से दूसरा युग जो बारह लाख छियानवे हज़ार (12960000) वर्ष का होता है
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दंपती
पति-पत्नी
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नित्य
सदा रहनिहार, स्थायी, अविनाशी
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परमार्थ
दे० 'परम'
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पवित्रक
कुशा
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पावन
पवित्र
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पिप्पल
पीपल।
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पीढ़ी
बैठने के लिए काठ या सूत की छोटी और ऊँची चौकी या आसन; वंशक्रम, कुल परम्परा में किसी के बाप, दादा, परदादा, अथवा बेटे, पोते, पर पोते के विचार से क्रमागत पुश्त
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पीपल
दे. पीप्पळ
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पूजित
जिसकी पूजा की गई हो
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प्रकृति
किसी पदार्थ या प्राणी का वह विशिष्ट भौतिक सारभूत तथा सहज व स्वाभाविक गुण जो उसके स्वरूप के मूल में होता है और जिसमें कभी कोई परिवर्तन नहीं होता, मूल या प्रधान गुण जो सदा बना रहे, तासीर
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प्रत्यय
विश्वास , मत ; प्रमाण ; विचार ; ज्ञान ; व्याकरण में वह अक्षर या अक्षर समूह, जो शब्दों के अंत में लगकर अर्थ का विकास करता है
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प्राण
दे. पिराण
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प्राप्त
पाओल, हाथ आएल
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बल
वह चक्कर या घुमाव जो किसी लचीली या नरम वस्तु को बढ़ाने या घुमाने से बीच-बीच में पड़ जाय, पेच, ऐंठन, मरोड़
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बोधिवृक्ष
बोधितरु
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ब्रह्म
ब्रह्मा, बर्हमा
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भला
अच्छा, उत्तम; निरोग; चंगा, सुंदर
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